अर्वाचीन संस्कृत साहित्य पर दो दिवसीय मंथन एवं विचार -विमर्श कल से

अर्वाचीन संस्कृत साहित्य पर दो दिवसीय मंथन एवं विचार -विमर्श कल से

Modern Sanskrit Literature Begins

Modern Sanskrit Literature Begins

देश भर से जुटेंगे विद्वान्-प्रो.राणा 

पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Modern Sanskrit Literature Begins: हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघौला में दिनांक 23 एवं 24 मार्च को अर्वाचीन संस्कृत साहित्यस्य सर्जन यात्रा विषय पर  राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी में आधुनिक संस्कृत साहित्य की समृद्ध परम्परा,अभिनव रचनाधर्मिता,प्रबल युगधर्मिता,नूतन विधाओं का नया संसार तथा आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विभिन्न रचनाओं की प्रासंगिकता इन सभी विषयों पर समालोचना एवं विमर्श किया जायेगा। संगोष्ठी के निदेशक एवं विद्यापीठ के प्राचार्य प्रो.दिलीप कुमार राणा ने बताया कि इस संगोष्ठी मेँ उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली,बिहार आदि विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित कवि,समीक्षक,चिन्तक,समालोचक,लेखक तथा युवा विद्वानों का व्याख्यान व्याख्यान होगा। दोनों दिनों में कुल 7 सत्र होंगे।इन सत्रों में सत्राध्यक्ष, मुख्य वक्ता तथा विचारक विभिन्न विषयों पर प्रकाश डालेंगे। संगोष्ठी के समन्वयक डा.राजकुमार मिश्र ने बताया कि इस विचार सत्र मेँ पद्मश्री प्रो.अभिराज राजेन्द्र मिश्र, प्रसिद्ध कवि प्रो.भागीरथी नन्द,प्रख्यात समालोचिका प्रो.सरोज कौशल, विख्यात गीतकार डा.अरविन्द तिवारी, प्रसिद्ध समीक्षक डा.कौशल तिवारी,प्रथित चिन्तक डा.अरुण निषाद ,प्रख्यात लेखिका डा.मंजुलता शर्मा, प्रसिद्ध शास्त्रकार डा.अनमोल शर्मा ,विश्रुत विद्वान् डा.नौनिहाल गौतम,लब्धप्रतिष्ठ आचार्य प्रो.अजय कुमार मिश्र,युवा लेखक डा.ललित किशोर शर्मा तथा प्रसिद्ध कवि डा.महेश नारायण शर्मा आदि आधुनिक संस्कृत साहित्य के विविध आयामों पर अपने मूल्यवान् विचार साझा करेंगे। संगोष्ठी के संयोजक डा.राधावल्लभ शर्मा तथा शुभंकर सामन्त हैं।गौरतलब है कि इन विचारकों में अधिकांश प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजे गए हैं।